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Monthly Archives: May 2011

MUSTAFA ZAIDI

I did not know that in the beginning Mustafa Zaidi was known as Tegh Allahabadi and that he was from Allaha bad. I found this material in the risala “NAQOOSH” published in 1969 from Lahore and I happen to have a copy (on loan from my friend Liaqat Ali). I wish to share it with my valued viewers

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Posted by on May 30, 2011 in MUSTAFA ZAIDI

 

asli ghee

 
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Posted by on May 25, 2011 in Jokes

 

SATTYAM EV JAYETE

 

सत्त्यम एव जयते

 
सत्यम एव जयते
यह संस्कृत का एक मशहूर फरमान है ।
लेकिन सच क्या है, जीत क्या है, यह एक सवाल है ।
इस का उत्तर क्या है
हम तो अक्सर जीतते जीतते जान कर हार जाते हैं । और इस हार में जीत से ज़ादा मज़ा होता है।
सच को ढूँढते ढूंढते झहूट की दीवार को चाटते हैं और जब दीवार ख़तम होती है तो सच भी घाएब हो जाता है ।
बस एक सुराख़ हासिल होता है।
सत्यम एव जयते का क्या यह मतलब है के जो सच होता है वोह जीतता है?
या जो जीतता है वोह सच होता है?
जीतने के लिए तुम्हारा सच होना ज़रूरी है
या सच सच जब ही हो गा के वोह जीत कर दिखाए?
और जीतना तो है मगर किस से। यानी हमारे (सच कह रहा है) साथ कौन खेल रहा है जिस से हम को जीतना है?……………….
क्या यह काफी नहीं है के सच सच है। क्या ज़रूरी है के वोह जीते भी?
सच तो बे निआज़ होता है। उस को जीत और हार से क्या लेना देना।
…………..

बक रहा हूँ जुनूँ में क्या क्या कुछ …….

 
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Posted by on May 25, 2011 in adab and literature

 

SURAH FATIHA AND GAYATRI MANTRA

Now I am no Theologian or an expert on Quraan e Hakim  or on Hindu Vedas. What follows is just an innocent observation by me and I wish to share it with you dear readers. YOU WILL MAKE YOUR OWN FINAL CONCLUSIONS AND UNDERSTANDING.

1. Surah Fatiha has two main aspects

(a) Description of and praise of Allah subhanahu wa Taala and mentioning of His some of many qualities

(b) Prayer to Allah (SWT)

2. Gayatri Mantra also is conprised of these two main aspects. The praises and other attributes are practically the same. The prayer is also same!

(The only thing missing in Gayatri mantra is the last ayat in which the prayer qulifies the sought guidance as of those… and NOT of those….)

NOW READ WITH AN OPEN MIND, AND CAREFULLY   O N L Y  IF YOU WANT TO LEARN. COMPARE THE TWO STEP BY STEP. WHAT DO YOU SEE? 

GAYATRI MANTRA – ITS MEANING

गायत्री मंत्र की व्याख्या

भूर्भुव: स्व:

तत्सवितुर्वरेन्यं

भर्गो

देवस्यधीमहि,

धीयो

यो:

प्रचोदयात्

।।

AUM BHOOR BHUWAH SWAHA,
TAT SAVITUR VARENYAM
BHARGO DEVASAYA DHEEMAHI
DHIYO YO NAHA PRACHODAYAT.

Summary of the Gayatri Mantra

Gayatri Mantra (the mother of the vedas), the foremost mantra in hinduism and hindu beliefs, inspires wisdom. Its meaning is that “May the Almighty God illuminate our intellect to lead us along the righteous path”. The mantra is also a prayer to the “giver of light and life” – the sun (savitur).

Oh God! Thou art the Giver of Life,
Remover of pain and sorrow,
The Bestower of happiness,
Oh! Creator of the Universe,
May we receive thy supreme sin-destroying light,
May Thou guide our intellect in the right direction.

 

Word for Word Meaning of the Gayatri Mantra

Aum = Brahma ;
bhoor = embodiment of vital spiritual energy(pran) ;
bhuwah = destroyer of sufferings ;
swaha = embodiment of happiness ;
tat = that ;
savitur = bright like sun ;
varenyam = best choicest ;
bhargo = destroyer of sins ;
devasya = divine ;
these first nine words describe the glory of God
dheemahi = may imbibe ; pertains to meditation
dhiyo = intellect ;
yo = who ;
naha = our ;
prachodayat = may inspire!
“dhiyo yo na prachodayat” is a prayer to God

Hence the Gayatri is unique in that it embodies the three concepts of stotra (singing the praise and glory of God), dhyaana (meditation) and praarthana (prayer).

FOR DETAILED DISCUSSION PLEASE GO TO THE FOLLOWING WEB SITE:

http://www.eaglespace.com/spirit/gayatribywords.php

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SURAH FATIHA

 

بِسْمِ اللّهِ الرَّحْمـَنِ الرَّحِيم 1:1

الْحَمْدُ للّهِ رَبِّ الْعَالَمِين 1:2

الرَّحمـنِ الرَّحِيم 1:3

مَـالِكِ يَوْمِ الدِّين 1:4

إِيَّاك نَعْبُدُ وإِيَّاكَ نَسْتَعِين 1:5

اهدِنَــــا الصِّرَاطَ المُستَقِيمَ 1:6

1:7

صِرَاطَ الَّذِينَ أَنعَمتَ عَلَيهِمْ غَيرِ المَغضُوبِ عَلَيهِمْ وَلاَ الضَّالِّين

 

1.Bismillah Ar-Rahman Ar-Raheem
2.Al-hamdu lillahi Rabb il-‘alamin
3.Ar-Rahman Ar-Raheem
4.Maliki yawmi-d-Din
5.Iyya-ka na’budu wa iyya-ka nasta’in
6.Ihdina-sirat al-mustaqim
7.Sirat al-ladhina an’amta ‘alai-him

Ghairil-Maghdubi ‘alai-him wa la-d-dallin

 

 

1.In the name of Allah, the Most Beneficent, the Most Merciful.
2.Praise be to Allah, Lord of the Worlds:
3.The Most Beneficent, the Most Merciful:
4.Owner of the Day of Judgement.
5.Thee (alone) we worship; Thee (alone) we ask for help.
6.Show us the straight path:
7.The path of those whom Thou hast favoured; Not (the path) of those who earn Thine anger nor of those who go astray.

 

 

 
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Posted by on May 23, 2011 in Quraan o Sunnat

 

Shamim ki diary se (post 4)

This will be the last post as the diary I have has come to its end as far as his kalaam is concerned.

I hope you will enjoy the entries. 

 

The last picture (Gannon ki tarseel) is the one I took on the road to Shahjahan pur from Bareilly at night near Mumuksh Ashram when the bus I was travelling in broke down. I had to purchase a lift on a passing truck till end of Garrah pul from where I took a rikshaw.  Dec. 1997. (Shakil Akhtar)

 
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Posted by on May 20, 2011 in Shamim (Baqalam Khud)

 

Yeh kya Zindagi hai

यह क्या ज़िन्दगी है 

यह क्या ज़िन्दगी है, यह कैसा जहाँ है
जिधर देखिये ज़ुल्म की दास्ताँ है।
यह शेर १९६४ में फिल्म थी उस में एक गाने का है नामं याद नहीं लेकिन आज भी यह उतना ही हस्बे हल हैऔर अगर तारीख की ओर देखें तो लगता है हमेशा ही से यही सूरत हाल रही है। हाँ मगर स्थानीय तौर पर देखें तो यहाँ न्यू ज़ीलैण्ड में राम राज का सा समां लगता है कभी कभी। इतना सुकून और अमन है, ऐसी साफ सफाई है काम यूं हो जाते है, गाड़ी चोरी हो जाये तो फून पर इन्सुरांस पैसे अकाउंट में दाल दे वगैरा। एक बार पिछले साल हमारी कमीज़ और पतलून गिर गए । यह दोनों चीज़ें हम पहने हुए थे । साथ में सर जोर से दरवाज़े के शीशे पर लगा वोह चकनाचूर हो गया (शीशा , सर नहीं) और इसी लिए सर में गुमडा भी नहीं पड़ा बस ज़रा कान के पास शीशा चुभ गया । इन्शोरांस ने फ़ोन पर ही आदमी भेज कर इतना महंगा शीश बदलवा दिया
ज्यादा तर काम phone पर hi हो जाते हें , के जी घबराने लगता है। हम जो तीसरी चौथी दुनिया वाले हैं इस के आदी नहीं है । यकायक जी चाहता है भाग कर वहीँ चले जाएँ जहाँ परेशानियाँ हैं और धोके हैं और क़दम क़दम पर लुटने के सामन हें । हमारे एक दोस्त कराची में कई हफ़्तों तक सिविक सेण्टर अपने एक जाइज़ काम के लिए खुआर हो ते रहे काम नहीं हुआ आखिर क्लर्क ने पूछा तुम क्या करते हो । कहा अध्यापक हूँ । वोह बोला पहले बताना चाहिय था यहाँ अद्यापकों और बेवाओं से कुछ नहीं लिया जाता। उनका काम हो गया।(यह सच्चा वाक्या है , उन का नाम रहमान है)
हिंदुस्तान और पाकिस्तान को अगर इन की तरह बनना है तो दो बातें करनी हों गी। आबादी पर कंटरोल और education . तीसरी बात यह के वेस्ट से पंगा मत लो। वोह जो कहते है इफ यू कांट विन them ज्वाइन them । कुछ यह कहें गे की ग़ुलामी से बेहतर है के आदमी मर जाय और कौमों को अपनी पहचान और अपनी सभ्यता के अनुस्सर जीना चाहिए । ठीक है तो मरो। चानकिया के अनुसार झुकना अच्छा है के उस में समय
गुजरने के बाद हालात पलटा खा सकते हें ।
लेकिन वेस्ट में सब अच्छा है ऐसा भी नहीं है। बाहर से सब टीप टाप है अन्दर देखो तो ज़ादा तर लोग बचैनी का शिकार हें। मार्केट इकोनोमी ने सब को , अधिकतर लोगों को, क़र्ज़ के जाल में फंसा कर रखा हुआ है। अंदरूनी सुकून जो हमें वहां सूखी रोटी और चटनी के साथ मिलता है वह यहाँ बहुत मुश्किल है यह एक डिलेमा है ।

क्या ख्याल है?
शकील अख्तर
 
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Posted by on May 14, 2011 in adab and literature

 

Shamim ki diary se (post 3)

HaseeN kiran ki chah meiN, mataa-e sabr lut gayee

Woh badnaseeb hooN jise sahar fareb de gayee

……………………

 
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Posted by on May 13, 2011 in Shamim (Baqalam Khud)